पीएफ से संबधित 10 महत्वपूर्ण सवाल एवं जवाब

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना नवम्बर 15, 1951 में की गयी थी | इसकी स्थापना कारखानों और अन्य संस्थानों में कार्यरत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए की गयी थी | कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय में उन सभी कार्यालयों और कारखानों को रजिस्टर कराना पड़ता है जहाँ पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं साथ ही अगर किसी व्यक्ति की सैलरी Rs. 15000/माह से कम है तो उसे नियमानुसार कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान करना पड़ता है |
इस पोस्ट में हम जानेंगे कुछ सवालों के जवाब जो अधिकतर लोगों के मन में उठते रहते हैं|

1. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) क्या है ?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना नवम्बर 15, 1951 में की गयी थी | इसकी स्थापना कारखानों और अन्य संस्थानों में कार्यरत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए की गयी थी | कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय के पास उन सभी कार्यालयों और कारखानों को रजिस्टर करना पड़ता है जहाँ पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं |

इस अधिनियम और उसके अन्दर बनी योजनाओं का क्रियान्वयन एक त्रिपक्षीय बोर्ड, केन्द्रीय न्यासी बोर्ड (Central Board of Trustee) द्वारा किया जाता है | यह कानून जम्मू और कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू है | इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि कर्मचारी भविष्य निधि में हर महीने कुछ रुपये जमा करके व्यक्ति अपने रिटायर्मेंट को सुखद बनाता है |

2. कर्मचारी भविष्य निधि में रूपया किस प्रकार जमा होता है ?

जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी में काम करना शुरू करता है तो उसकी बेसिक सैलरी का 12% उसकी सैलरी से काटा जाता है और इतना ही योगदान कंपनी (Employer) की तरफ से दिया जाता है | व्यक्ति की सैलरी का 12% कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में पूरा जमा हो जाता है जबकि कंपनी द्वारा किये गये योगदान का केवल 3.67 % ही इसमें जमा होता है बकाया का 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (Employee’s Pension Scheme-EPS) में जमा हो जाता है | उदहारण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी Rs. 5000/माह है तो इसमें से सिर्फ 8.33% ( Rs.416) ही कर्मचारी पेंशन योजना (Employee’s Pension Scheme-EPS) में जमा होंगे बकाया रुपया EPF में जमा हो जाता है |

इसी प्रकार कई कर्मचारियों और कार्यालयों से एकत्रित धन को जोड़कर EPF account बनाया जाता है | इस एकत्रित धन पर प्रतिवर्ष ब्याज का भुगतान किया जाता है जिसका निर्धारण सरकार और केन्द्रीय न्यासी बोर्ड करता है| वर्तमान वर्ष में दी जाने वाली ब्याज दर 8.65% है |

3. क्या EPF में जमा पूरे धन पर ब्याज का लाभ मिलता है ?

नहीं, सरकार की ओर से दिया जाने वाला ब्याज सिर्फ उस धन पर मिलता है जो कि कर्मचारी की सैलरी से काटा जाता है अर्थात EPS के अंतर्गत जमा धन पर ब्याज नही मिलता है |

4. क्या EPF पर भी नॉमिनेशन की सुविधा मिलती है ?

जी हाँ, आप अपने ईपीएफ के लिए भी नॉमिनेशन सुविधा ले सकते हैं। आपकी मृत्यु होने के बाद आपके नॉमिनी को आपके पीएफ का सारा पैसा दिया जाता है। अपने ईपीएफ अकाउंट के लिए नॉमिनी को चेंज करने या अपडेट करने के लिए फॉर्म नंबर 2 भरना पड़ता है। इसके लिए आपको अपनी कंपनी के वित्त विभाग या फिर सीधे ईपीएफओ विभाग को यह फॉर्म भेजना होता है।

5. क्या EPF में भी पेंशन मिल सकती है?

हाँ, दरअसल कर्मचारी की सैलरी से हर महीने जो रकम काटी जाती है उसका मुख्य मकसद आपको सेवा मुक्त होने के बाद वित्तीय रूप से सक्षम रखना ही है | हालांकि पेंशन पाने के लिए निम्न शर्तों को मानना जरूरी है |

(i) पेंशन 58 वर्ष की आयु के बाद ही मिलती है।

(ii) पेंशन केवल तब ही मिल सकती है जब आपने नौकरी के 10 साल पूरे किए हों। अगर आपने नौकरी बदली है तो उस स्थिति में आपका ईपीएफ अकांउट ट्रांसफर किया गया हो।

(iii) न्यूनतम पेंशन 1000 रूपए प्रति माह, जबकि अधिकतम 3250 रूपए प्रति माह दी जाती है।

(iv) यह पेंशन ईपीएफ खाता धारक को आजीवन और उसके मरने के बाद उसके परिवार को दी जाती है।

6. क्या EPF का पूरा पैसा निकाला जा सकता है ?

जी हाँ,यदि आप 6 माह से ज्यादा नौकरी करते हैं,तो नौकरी छोड़ने के बाद फॉर्म 19 और 10c भरकर अपना पूरा पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं|लेकिन 6 माह से कम के नौकरी पर पेंशन का पैसा नहीं निकाल सकते केवल पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं|

7. क्या EPF में ज्यादा योगदान भी किया जा सकता है ?

कर्मचारी की तरफ से ईपीएफ, बेसिक सैलेरी का 12 फीसदी हर महीने काटा जाता है, लेकिन अगर कर्मचारी अपने शेयर को बढ़ाना चाहें तो ऐसा भी कर सकते हैं। इसे वीपीएफ यानी कि वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड कहते हैं। यह अतिरिक्त रकम आपके पीएफ में ही निवेश की जाती है और इस पर आपको ब्याज मिलता है, लेकिन इसमें यह जरूरी नहीं है कि आपकी कंपनी भी आपके बराबर पैसे का योगदान दे, वह नियमानुसार केवल 12 % ही योगदान करता है |

8. क्या आप जानते हैं कि जॉब बदलने के तुरंत बाद EPF का पैसा निकालना गैर-कानूनी है ?

अक्सर यह देखा जाता है कि लोग नौकरी छोड़ने के बाद ईपीएफ से पैसा निकल लेते हैं लेकिन ईपीएफ नियमों के मुताबिक यह गैरकानूनी है। आप ईपीएफ की रकम केवल तब निकाल सकते हैं जब आप पिछले 2 महीने से बेरोजगार बैठे हों। अगर आप नौकरी बदलते हैं तो आपको केवल अपना पीएफ अकाउंट ट्रांसफर करने की अनुमति होती है। हालांकि ईपीएस (एम्पलॉईज पेंशन स्कीम) के केस में अगर आपकी नौकरी के 10 साल पूरे नहीं हुए हैं तो आप पैसा निकाल सकते हैं, लेकिन 10 साल पूरे होने के बाद आप यह पैसा रिटायरमेंट पर ही निकाल सकते हैं, उससे पहले नहीं।

9. क्या कर्मचारी EPF में पैसा कटवाने से मना कर सकता है ?

हाँ, यह आपको चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन यह सच है। अगर आपकी सैलेरी 15000 रूपए प्रति माह से ज्यादा है तो आप पीएफ में निवेश करने से मना कर सकते हैं और अपनी सैलेरी में से पीएफ के नाम पर कटौती को बंद कर सकते हैं। इसके लिए अहम नियम यह है कि आपको नौकरी शुरू करने से पहले पीएफ फंड से बाहर रहने का विकल्प चुनना होगा। अगर आप ऎसा करते हैं तो इसके लिए आपको फॉर्म नंबर 11 भी भरना पड़ता है । वहीं अगर आप एक बार ईपीएफ का हिस्सा बन जाते हैं, तो फिर आप इससे बाहर नहीं आ सकते। यानी कि अगर आपका ईपीएफ खाता पहले से है, तो यह विकल्प आपके लिए नहीं है।

10. क्या खास जरूरतों के लिए EPF की रकम निकाल सकते हैं ?

नौकरी करते समय ईपीएफ का पैसा निकलने की इजाजत नहीं होती, लेकिन ऐसे कुछ खास मौके हैं जिनके लिए ईपीएफ की कुछ राशि निकाली जा सकती है, हालांकि इसके तहत भी आप पूरी राशि नहीं निकाल सकते।

(i) अपने या परिवार (पति/पत्नी, बच्चे या डिपेंडेंट पेरेंट्स) के इलाज के लिए अधिकतम सैलेरी की 6 गुना रकम निकाली जा सकती है। मेडिकल इलाज में सर्जरी, टीबी, कोढ़, पैरालिसिस, कैंसर, और हैल्थ सम्बंधित बीमारियाँ शामिल हैं।

(ii) अपनी, बच्चों की या भाई-बहन की शादी या एजुकेशन के लिए आपकी पूरी रकम का 50 % तक निकाला जा सकता है। ऐसा आप अपनी नौकरी के दौरान तीन बार कर सकते हैं।

(iii) ‘हाउस लोन’ को चुकाने के लिए सैलेरी का 36 गुना तक रकम निकालने की इजाजत होती है।

(iv) अपने पति या पत्नी या सामूहिक जिम्मेदारी पर लिए गए घर की मरम्मत के लिए सैलेरी की 12 गुना तक रकम निकाली जा सकती है। इस सुविधा का प्रयोग केवल एक बार किया जा सकता है |

(v) अपने लिए, स्पाउस के लिए या दोनों के लिए जॉइंटली प्लॉट या घर खरीदने या बनाने के लिए सैलेरी की 36 गुना तक रकम निकाली जा सकती है। प्लॉट खरीदने के लिए यह लिमिट 24 गुना तक है।

source:ndtv india

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Hiii Friends, i am Yogesh Nayak author of this website,and i tried to help all indians,about epf/uan/pension/edli and esic benifits.i also try to give you tutorials,information and answer your questions.i hope you help me. Lot of thanks.....

4 Comments

  1. Sir mera pf ka claim status settled ho gya h or 14-09-2018 ko neft se dispatch bhi ho gya h lekin pesa Abhi tak nhi aaya pls sir mujhe btao ki mera. Pesa kab tak aa jayega

  2. Kya 20 karmchari se adhik rakhne wale karkhane ya pvt ltd. Wale udyog ko epf mai panjiyan karna awashyak hai ya won deney kar skte hai

  3. SIR MERI 2 COMPINIES KA PF EK HI UAN NO PR JAMA HO RHA THA MENE JB PF KA AMOUNT NIKALNE KE LIYE FORM FILE KIYA TO USME SE MERE 5800RS SOMETHING AA GYE HAI BUT MERE PF KA AMOUNT 20000RS KE SOMETHING BAN RHA THA MERA BAKIKA PF AMOUNT KYU NHI AAYA HAI KB TK AA SKTA H MENE APNA FORM 23 JANUARY KO FILE KIYA MERE AC. ME RS5800 10FEB KO AA GYA THE BAKI KE KB AAYEGE AGR NHI AYE TO MUJHE KYA KRNA HOGA

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